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रघुवंशम् • अध्याय 8 • श्लोक 39
उभयोरपि पार्श्ववर्तिनां तुमुलेनार्तरवेण वेजिताः । विहगाः कमलाकरालयाः समदुःखा इव तत्र चुक्रुशुः ॥
उन दोनों के पास रहने वाले पक्षी भी उनके करुण विलाप से व्याकुल होकर ऐसे चिल्लाने लगे मानो वे भी उनके दुःख में सहभागी हों।
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