स परार्ध्यगतेरशोच्यतां पितुरुद्दिश्य सदर्थवेदिभिः । शमिताधिरधिज्यकार्मुकः कृतवानप्रतिशासनं जगत् ॥
पिता की उत्तम गति को जानकर उसने शोक त्याग दिया और मन को स्थिर कर धनुष की डोरी की तरह संयमित होकर संसार का शासन करने लगा।
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