मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 8 • श्लोक 22
न नवः प्रभुरा फलोदयात्स्थिरकर्मा विरराम कर्मणः । न च योगविधेर्नवेतरः स्थिरधीरा परमात्मदर्शनात् ॥
नए राजा ने कर्मों के फल मिलने पर भी अपने कार्यों को नहीं छोड़ा, और रघु ने भी परमात्मा का साक्षात्कार होने पर योग का मार्ग नहीं त्यागा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें