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रघुवंशम् • अध्याय 8 • श्लोक 21
पणबन्धमुखान्गुणानजः षडुपायुङ्क्त समीक्ष्य तत्फलम् । रघुरप्यजयत्गुणत्रयं प्रकृतिस्थं समलोष्टकाञ्चनः ॥
अज ने छह प्रकार के उपायों का यथोचित प्रयोग कर उनके फल को प्राप्त किया, जबकि रघु ने समदर्शी होकर सत्त्व, रज और तम—इन तीनों गुणों पर विजय प्राप्त की।
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