प्रसन्न होने पर भी लज्जा के कारण उसने अपनी सखियों के सामने सीधे शब्दों में प्रसन्नता व्यक्त नहीं की, जैसे वर्षा से भीगी भूमि पर मोरों की ध्वनि से बादलों का स्वागत होता है।
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