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रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 68
तस्याः प्रतिद्वन्द्विभवाद्विषादात्सद्यो विमुक्तं मुखमाबभासे । निःश्वासबाष्पापगमात्प्रपन्नः प्रसादमात्मीयमिवात्मदर्शः ॥
शत्रुओं के पराजित हो जाने पर उसका विषाद दूर हो गया और आँसुओं के हटने से उसका मुख अपने स्वाभाविक सौंदर्य से युक्त होकर प्रसन्न दिखने लगा।
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