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रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 63
ततः प्रियोपात्तरसेऽधरोष्ठे निवेश्य दध्मौ जलजं कुमारः । तेन स्वहस्तार्जितमेकवीरः पिबन्यशो मूर्तमिवाबभासे ॥
तब कुमार ने अपने अधरों से शंख धारण कर उसे बजाया और ऐसा प्रतीत हुआ मानो वह अपने पराक्रम से अर्जित यश का स्वयं पान कर रहा हो।
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