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रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 60
सोऽस्त्रव्रजैश्छन्नरथः परेषां ध्वजाग्रमात्रेण बभूव लक्ष्यः । नीहारमग्नो दिनपूर्वभागः किंचित्प्रकाशेन विवस्वतेव ॥
वह अपने रथ पर अस्त्रों से ढका हुआ था, केवल ध्वज का अग्रभाग ही दिखाई देता था, जैसे कुहासे में ढका हुआ प्रातःकाल का सूर्य केवल हल्का सा प्रकाश देता है।
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