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रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 5
ततस्तदालोकनतत्पराणां सौधेषु चामीकरजालवत्सु । बभूवुरित्थं पुरसुन्दरीणां त्यक्तान्यकार्याणि विचेष्टितानि ॥
तब महलों की स्वर्णजटित जालियों से उन्हें देखने में मग्न नगर की स्त्रियों ने अपने अन्य कार्य छोड़कर विभिन्न चेष्टाएँ करने लगीं।
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