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रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 46
आधोरणानां गजसंनिपाते शिरांसि चक्रैर्निशितैः क्षुराग्रैः । हतान्यपि श्येननखाग्रकोटिव्यासक्तकेशानि चिरेण पेतुः ॥
हाथियों की भिड़ंत में, तीक्ष्ण चक्रों से कटे हुए सिर, जिनके केश बाज के पंजों जैसे नाखूनों में उलझे थे, देर से गिरते थे।
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