धनुर्धरों के बाण, जो बीच मार्ग में ही शत्रु के बाणों से कट गए थे, अपने लक्ष्य तक पहुँच गए, मानो अपने अग्रभाग के कारण ही शेष भाग उनका अनुसरण कर रहा हो।
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