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रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 45
अप्यर्धमार्गे परबाणलूना धनुर्भृतां हस्तवतां पृषत्काः । संप्रापुरेवात्मजवानुवृत्त्या पूर्वार्धभागैः फलिभिः शरव्यम् ॥
धनुर्धरों के बाण, जो बीच मार्ग में ही शत्रु के बाणों से कट गए थे, अपने लक्ष्य तक पहुँच गए, मानो अपने अग्रभाग के कारण ही शेष भाग उनका अनुसरण कर रहा हो।
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