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रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 35
तमुद्वहन्तं पथि भोजकन्यां रुरोध राजन्यगण स दृप्तः । बलिप्रदिष्टां श्रियमाददानं त्रैविक्रमं पादमिवेन्द्रशत्रुः ॥
अज जब भोजकन्या को साथ लेकर जा रहा था, तब उन अभिमानी राजाओं ने उसका मार्ग रोक लिया, जैसे बलि से लक्ष्मी को लेते समय इन्द्र के शत्रु ने त्रिविक्रम के चरण को रोकना चाहा हो।
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