इति स्वसुर्भोजकुलप्रदीपः संपाद्य पाणिग्रहणं स राजा । महीपतीनां पृथगर्हणार्थं समादिदेशाधिकृतानधिश्रीः ॥
इस प्रकार भोजकुल के दीपक उस राजा ने अपनी बहन का पाणिग्रहण सम्पन्न कराकर, अन्य राजाओं के सत्कार के लिए अधिकारियों को आदेश दिया।
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