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रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 22
आसीद्वरः कण्टकितप्रकोष्ठः स्विन्नाङ्गुलिः संववृते कुमारी । तस्मिन्द्वये तत्क्षणमात्मवृत्तिः समं विभक्तेव मनोभवेन ॥
वर के भुजाओं में रोमांच हो उठा और वधू के हाथ पसीने से भीग गए; उस क्षण कामदेव ने मानो अपने प्रभाव को दोनों में समान रूप से बाँट दिया।
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