मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 21
हस्तेन हस्तं परिगृह्य वध्वाः स राजसूनुः सुतरां चकासे । अनन्तराशोकलताप्रवालं प्राप्येव चूतः प्रतिपल्लवेन ॥
वधू का हाथ अपने हाथ में लेकर वह राजकुमार अत्यन्त शोभायमान हुआ, जैसे आम का वृक्ष अशोक लता के नव पल्लव को पाकर और भी सुन्दर हो उठता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें