ततोऽवतीर्याशु करेणुकायाः स कामरूपेश्वरदत्तहस्तः । वैदर्भनिर्दिष्टमथो विवेश नारीमनांसीव चतुष्कमन्तः ॥
फिर वह हाथी से उतरकर, कामदेव के समान सुन्दर हाथों वाला, विदर्भराज द्वारा निर्देशित स्थान में इस प्रकार प्रवेश किया जैसे स्त्रियों के मन में प्रवेश करता हो।
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