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रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 14
परस्परेण स्पृहणीयशोभं न चेदिदं द्वन्द्वमयोजयिष्यत् । अस्मिन्द्वये रूपविधानयत्नः पत्युः प्रजानां वितथोऽभविष्यत् ॥
यदि यह युगल, जो परस्पर की शोभा बढ़ाने वाला है, एक न होता, तो सृष्टिकर्ता का इन दोनों के रूप को बनाने का प्रयास व्यर्थ हो जाता।
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