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रघुवंशम् • अध्याय 7 • श्लोक 11
तासां मुखैरासवगन्धगर्भैर्व्याप्तान्तराः सान्द्रकुतूहलानाम् । विलोलनेत्रभ्रमरैर्गवाक्षाः सहस्रपत्राभरणा इवासन् ॥
उन स्त्रियों के मदिरा-सुगंध से भरे मुखों और चंचल नेत्ररूपी भँवरों के कारण, उनकी जिज्ञासा से भरे हुए झरोखे ऐसे प्रतीत हो रहे थे मानो सहस्र पंखुड़ियों वाले कमलों से अलंकृत हों।
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