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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 9
पुरोपकण्टोपवनाश्रयाणां कलापिनामुद्धतनृत्तहेतौ । प्रध्मातशङ्खे परितो दिगन्तांस्तूर्यस्वने मूर्च्छति मङ्गलार्थे ॥
नगर के उपवनों में रहने वाले मोर नृत्य करने लगे, शंखनाद गूँज उठा और मंगल के लिए बजते वाद्यों की ध्वनि से दिशाएँ भर गईं।
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