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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 66
स्वसुर्विदर्भाधिपतेस्तदीयो लेभेऽन्तरं चेतसि नोपदेशः । दिवाकरादर्शनबद्धकोशे नक्षत्रनाथांशुरिवारविन्दे ॥
किन्तु विदर्भराज की बहन के मन में उसका यह उपदेश स्थान नहीं पा सका, जैसे सूर्य के अभाव में बंद कमल में चन्द्रमा की किरणें प्रवेश नहीं कर पातीं।
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