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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 62
अस्त्रं हरादाप्तवता दुरापं येनेन्द्रलोकावजयाय दृप्तः । पुरा जनस्थानविमर्दशङ्की संधाय लङ्काधिपतिः प्रतस्थे ॥
जिसने भगवान शिव से दुर्लभ अस्त्र प्राप्त कर इन्द्रलोक को जीतने का साहस किया था, वही लंका का राजा रावण भी पहले जनस्थान के विनाश की आशंका से इससे युद्ध के लिए तैयार होकर निकला था।
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