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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 61
विन्ध्यस्य संस्तम्भयिता महाद्रेर्निःशेषपीतोज्झितसिन्धुराजः । प्रीत्याश्वमेधावभृथार्द्रमूर्तेः सौस्नातिको यस्य भवत्यगस्त्यः ॥
यह वही राजा है जिसके कारण महर्षि अगस्त्य, जिन्होंने समुद्र को पी लिया और विन्ध्य पर्वत को स्थिर कर दिया, उसके अश्वमेध यज्ञ के अवभृथ स्नान में सम्मिलित होकर प्रसन्न होते हैं।
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