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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 58
प्रलोभिताप्याकृतिलोभनीया विदर्भराजावरजा तयैवम् । तस्मादपावर्तत दूरकृष्टा नीत्येव लक्ष्मीः प्रतिकूलदैवात् ॥
इस प्रकार आकर्षित किए जाने पर भी, अपनी स्वाभाविक लज्जा के कारण विदर्भराज की बहन उससे हट गई, जैसे प्रतिकूल भाग्य के कारण लक्ष्मी दूर चली जाती है।
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