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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 57
अनेन सार्धं विहराम्बुराशेस्तीरेषु तालीवनमर्मरेषु । द्वीपान्तरानीतलवङ्गपुष्पैरपाकृतस्वेदलवा मरुद्भिः ॥
इसके साथ समुद्र के तटों पर, ताड़ के वृक्षों की सरसराहट में विहार करो, जहाँ द्वीपों से लाए गए लवंग के पुष्पों की सुगंध से युक्त वायु तुम्हारे पसीने की बूँदों को दूर कर देती है।
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