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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 55
ज्याघातरेखे सुभुजो भुजाभ्यां बिभर्ति यश्चापभृतां पुरोगः । रिपुश्रियां साञ्जनबाष्पसेके बन्दीकृतानामिव पद्धती द्वे ॥
यह सुन्दर भुजाओं वाला राजा, धनुष के प्रहार के चिन्हों को धारण किए हुए, शत्रुओं की स्त्रियों की आँखों के आँसुओं से उनकी शोभा को मानो दो धाराओं में विभक्त कर देता है।
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