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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 51
अध्यास्य चाम्भःपृषतोक्षितानि शैलेयगन्धीनि शिलातलानि । कलापिनां प्रावृषि पश्य नृत्यं कान्तासु गोवर्धनकन्दरासु ॥
वर्षा ऋतु में जलकणों से भीगी और पर्वतीय सुगंध से युक्त शिलाओं पर बैठकर, गोवर्धन की रमणीय गुफाओं में मोरों का नृत्य देखो।
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