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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 48
यस्यावरोधस्तनचन्दनानां प्रक्षालनाद्वारिविहारकाले । कलिन्दकन्या मथुरां गतापि गङ्गोर्मिसंसक्तजलेव भाति ॥
जिसके महल की स्त्रियों के स्नान से धुले चन्दन के कारण, यमुना मथुरा में भी गंगा की तरंगों से मिश्रित जल के समान प्रतीत होती है।
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