तब उस कन्या ने शूरसेन के राजा सुषेण की ओर संकेत करते हुए कहा, जिसकी कीर्ति अन्य लोकों में भी गाई जाती है और जो दोनों वंशों का गौरव तथा आचरण से शुद्ध है।
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