तस्याः प्रकामं प्रियदर्शनोऽपि न स क्षितीशो रुचये बभूव । शरत्प्रमृष्टाम्बुधरोपरोधः शशीव पर्याप्तकलो नलिन्याः ॥
यद्यपि वह राजा अत्यन्त सुन्दर था, फिर भी वह उसे प्रिय नहीं लगा, जैसे शरद ऋतु में स्वच्छ आकाश में चन्द्रमा भी कमलिनी के लिए पर्याप्त आकर्षक नहीं होता।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।