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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 43
अस्याङ्कलक्ष्मीर्भव दीर्घबाहोर्माहिष्मतीवप्रनितम्बकाञ्चीम् । प्रासादजालैर्जलवेणिरम्यां रेवां यदि प्रेक्षितुमस्ति कामः ॥
हे सुन्दरी! यदि तुम्हें जलधाराओं से सुशोभित प्रासादों वाली रेवती (नर्मदा) को देखना है, तो इस दीर्घबाहु राजा की गोद में लक्ष्मी के समान स्थान ग्रहण करो।
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