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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 42
आयोधने कृष्णगतिं सहायमवाप्य यः क्षत्रियकालरात्रिम् । धारां शितां रामपरश्वधस्य संभावयत्युत्पलपत्रसाराम् ॥
जिसने युद्ध में श्रीकृष्ण को सहायक बनाकर क्षत्रियों के लिए कालरात्रि समान परशुराम के तीक्ष्ण परशु की धार को भी कमलपत्र के समान कोमल समझा।
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