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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 32
अवन्तिनाथोऽयमुग्रबाहुर्विशालवक्षास्तनुवृत्तमध्यः । आरोप्य चक्रभ्रममुष्णतेजास्त्वष्ट्रेव यत्नोल्लिखितो विभाति ॥
यह अवन्ति का राजा है, जिसकी भुजाएँ बलशाली, वक्ष विशाल और मध्यभाग सुडौल है। यह अपने तेज से ऐसा प्रतीत होता है मानो त्वष्टा ने विशेष परिश्रम से इसे गढ़ा हो।
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