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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 25
एवं तयोक्ते तमवेक्ष्य किंचिद्विस्रंसिदूर्वाङ्कमधूकमाला । ऋजुप्रणामक्रिययैव तन्वी प्रत्यादिदेशैनमभाषमाणा ॥
ऐसा कहे जाने पर उस कन्या ने उसे देखा, उसकी दूर्वा और मधूक की माला कुछ ढीली पड़ गई, और उसने बिना कुछ बोले ही सरल प्रणाम द्वारा उसे अस्वीकार कर दिया।
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