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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 22
कामं नृपाः सन्तु सहस्रशोऽन्ये राजन्वतीमाहुरनेन भूमिम् । नक्षत्रताराग्रहसंकुलापि ज्योतिष्मती चन्द्रमसैव रात्रिः ॥
अन्य हजारों राजा भले ही हों, पर पृथ्वी इसी से शोभायमान है। जैसे नक्षत्रों और ग्रहों से भरी होने पर भी रात्रि चन्द्रमा से ही उज्ज्वल होती है।
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