असौ शरण्यः शरणोन्मुखानामगाधसत्त्वो मगधप्रतिष्ठः । राजा प्रजारञ्जनलब्धवर्णः परंतपो नाम यथार्थनामा ॥
यह मगध देश का प्रतिष्ठित राजा है, जो शरणागतों का आश्रय देने वाला और गम्भीर स्वभाव का है। प्रजा को प्रसन्न रखने के कारण इसकी कीर्ति फैली है, और "परंतप" नाम इसके स्वभाव के अनुरूप है।
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