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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 2
रतेर्गृहीतानुनयेन कामं प्रत्यर्पितस्वाङ्गमिवेश्वरेण । काकुत्स्थमालोकयतां नृपाणां मनो बभूवेन्दुमतीनिराशम् ॥
जैसे कामदेव को रति के अनुरोध पर शिव ने पुनः शरीर प्रदान किया हो, वैसे ही काकुत्स्थ (अज) को देखकर अन्य राजाओं का मन इन्दुमती के विषय में निराश हो गया।
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