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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 17
विलासिनीविभ्रमदन्तपत्रमपाण्डुरं केतकबर्हमन्यः । प्रियानितम्बोचितसंनिवेशैर्विपाटयामास युवा नखाग्रैः ॥
एक युवक ने अपने नखों से केतकी के पुष्प को ऐसे तोड़ा, मानो वह अपनी प्रिय के शृंगार के अनुरूप उसे सजाना चाहता हो।
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