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रघुवंशम् • अध्याय 6 • श्लोक 12
तां प्रत्यभिव्यक्तमनोरथानां महीपतीनां प्रणयाग्रदूत्यः । प्रवालशोभा इव पादपानां श‍ृङ्गारचेष्टा विविधा बभूवुः ॥
उस कन्या के प्रति अपने प्रेम को प्रकट करने के लिए राजाओं की विविध श्रृंगारिक चेष्टाएँ ऐसे दिखाई देने लगीं जैसे वृक्षों पर उगते हुए लाल प्रवाल।
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