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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 76
अथ विधिमवसाय्य शास्त्रदृष्टं दिवसमुखोचितमञ्चिताक्षिपक्ष्मा । कुशलविरचितानुकूलवेशः क्षितिपसमाजमगात्स्वयंवरस्थम् ॥
तत्पश्चात् शास्त्रानुसार प्रातःकाल के कर्तव्यों को पूरा करके, नेत्रों को सजाकर और उपयुक्त वस्त्र धारण कर वह कुमार राजाओं की सभा में स्वयंवर के लिए पहुँचा।
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