इस प्रकार बंधुओं की वाणी सुनकर कुमार तुरंत जाग उठा और शय्या से उठ गया। मदमत्त हंसों के मधुर शब्दों से जागृत होकर वह ऐसा शोभायमान हुआ जैसे स्वर्ग का हाथी गंगा के तट पर खड़ा हो।
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