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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 7
क्रियानिमित्तेश्वपि वत्सलत्वादभग्नकामा मुनिभिः कुशेषु । तदङ्कशय्याच्युतनाभिनाला कच्चिन्मृगीणामनघा प्रसूतिः ॥
क्या मुनियों द्वारा स्नेहवश कुशों पर सुलाए जाने वाली हिरणियों की निष्कलंक प्रसूतियाँ, जिनके शावक उनकी गोद में रहते हैं, बिना किसी विघ्न के संपन्न हो रही हैं?
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