रात्रि में आपकी प्रतीक्षा करती हुई वह नारी (इन्दुमती) भी आपकी ओर देखे बिना ही व्याकुल रही, जैसे खण्डिता नायिका होती है। और वह चन्द्रमा, जो दिशाओं को आलोकित करता है, वह भी आपके मुख की आभा के सामने फीका पड़ जाता है।
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