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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 62
प्रवेश्य चैनं पुनरग्रयायी नीचैस्तथोपाचरदर्पितश्रीः । मेने यथा तत्र जनः समेतो वैदर्भमागन्तुमजं गृहेशम् ॥
उसे भीतर ले जाकर राजा ने अत्यन्त विनम्रता से उसका सत्कार किया, यद्यपि वह ऐश्वर्य से सम्पन्न था। वहाँ एकत्र लोगों ने ऐसा समझा मानो अज स्वयं लक्ष्मी को अपने घर लाने आए हों।
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