नगर के समीप ठहरे हुए उस कुमार के आगमन से अत्यन्त प्रसन्न होकर क्रथकैशिक नरेश उसका स्वागत करने ऐसे चले जैसे बढ़ी हुई तरंगों वाला समुद्र चन्द्रमा की ओर बढ़ता है।
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