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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 61
तं तस्थिवांसं नगरोपकण्ठे तदागमारूढगुरुप्रहर्षः । प्रत्युज्जगाम क्रथकैशिकेन्द्रश्चन्द्रं प्रवृद्धोर्मिरिवोर्मिमाली ॥
नगर के समीप ठहरे हुए उस कुमार के आगमन से अत्यन्त प्रसन्न होकर क्रथकैशिक नरेश उसका स्वागत करने ऐसे चले जैसे बढ़ी हुई तरंगों वाला समुद्र चन्द्रमा की ओर बढ़ता है।
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