तब उस चन्द्रवंशी समान राजा ने सोम से उत्पन्न उस पवित्र नदी के जल का आचमन कर उत्तरमुख होकर उस शापमुक्त गन्धर्व से अस्त्र-मन्त्र ग्रहण किया।
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