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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 59
तथेत्युपस्पृश्य पयः पवित्रं सोमोद्भवायाः सरितो नृसोमः । उदङ्मुखः सोऽस्त्रविदस्त्रमन्त्रं जग्राह तस्मान्निगृहीतशापात् ॥
तब उस चन्द्रवंशी समान राजा ने सोम से उत्पन्न उस पवित्र नदी के जल का आचमन कर उत्तरमुख होकर उस शापमुक्त गन्धर्व से अस्त्र-मन्त्र ग्रहण किया।
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