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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 58
अलं ह्रिया मां प्रति यन्मुहूर्तं दयापरोऽभूः प्रहरन्नपि त्वम् । तस्मादुपच्छन्दयति प्रयोज्यं मयि त्वया न प्रतिषेधरौक्ष्यम् ॥
तुमने मुझ पर प्रहार करते हुए भी क्षणभर के लिए दया दिखाई, इसलिए संकोच छोड़कर मेरी यह भेंट स्वीकार करो और मुझे अस्वीकार कर कठोरता न दिखाओ।
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