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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 47
तस्यैकनागस्य कपोलभित्त्योर्जलावगाहक्षणमेकशान्ता । वन्येतरानेकपदर्शनेन पुनर्दिदीपे मददुर्दिनश्रीः ॥
उस हाथी के गण्डस्थलों पर जल में डूबने के समय जो मद की धारा कुछ शांत हो गई थी, वह अनेक हाथियों को देखकर पुनः प्रबल हो उठी।
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