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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 46
शैलोपमः शैवलमञ्जरीणां जालानि कर्षन्नुरसा स पश्चात् । पूर्वं तदुत्पीडितवारिराशिः सरित्प्रवाहस्तटमुत्ससर्प ॥
पर्वत के समान वह हाथी अपने वक्ष से शैवालों के गुच्छों को खींचता हुआ चला, और उसके दबाव से जलराशि पहले ही तट की ओर उमड़ पड़ी।
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