मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 38
उत्पातविद्यं विधिवद्गुरुभ्यस्तं यौवनोद्भेदविशेषकान्तम् । श्रीः साभिलाषापि गुरोरनुज्ञां धीरेव कन्या पितुराचकाङ्क्ष ॥
उसने विधिपूर्वक गुरुओं से समस्त विद्याएँ प्राप्त कीं और यौवन में विशेष शोभा से युक्त हुआ। जैसे कोई लज्जाशील कन्या पिता की अनुमति की प्रतीक्षा करती है, वैसे ही लक्ष्मी भी उसे प्राप्त करने की इच्छा से गुरु की आज्ञा की प्रतीक्षा करती रही।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
रघुवंशम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

रघुवंशम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें