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रघुवंशम् • अध्याय 5 • श्लोक 35
इत्थं प्रयुज्याशिषमग्रजन्मा राज्ञे प्रतीयाय गुरोः सकाशम् । राजापि लेभे सुतमाशु तस्मादालोकमर्कादिव जीवलोकः ॥
इस प्रकार आशीर्वाद देकर वह ब्राह्मण अपने गुरु के पास लौट गया। उसी के फलस्वरूप राजा को शीघ्र ही पुत्र की प्राप्ति हुई, जैसे संसार को सूर्य से प्रकाश प्राप्त होता है।
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